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Thursday, 9 January 2014

चने की इल्ली एक खतरनाक कीट बताए गए उपायों से फसल को कीट से बचाया जा सकता है

चने की इल्ली एक खतरनाक कीट

बताए गए उपायों से फसल को कीट से बचाया जा सकता है

खंडवा (9 जनवरी 2014) - चना रबी मौसम की प्रमुख दलहन की फसल है। चने की इल्ली (हेलि को वर्पा ) मुख्य रूप से चने की फसल को नुकसान पहुंचाती है। जिसकी रोकथाम के उपायों की जानकारी देते हुए उपसंचालक किसान कल्याणय तथा कृषि विभाग ने बताया कि जिले के किसान भाई -
§    प्रारंभिक प्रकोप अवस्था में सीमित क्षेत्र में जहाँ तक संभव हो, वहाँ इसकी इल्लिया एकत्रित कर नष्ट कर देना लाभदायक होता है।
§    प्रकाश प्रपंच द्वारा कीट की वयस्क तथा फेरोमेन प्रपंच द्वारा नर पंखियांे को एकत्रित कर नष्ट किया जा सकता है।
§    कीट की   रोकथाम   हेतु  फेनवलरेट 40 प्रतिशत या किवनालफास 1.5  प्रतिशत  या पैराथियान 2 प्रतिशत का 20-25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से भुरकाव करंे।
§    मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल. या मिथाइल पैराथियान 50 ई.सी. 750 मि.ली. से 1 लीटर प्रति हेक्टर या किवनालाफास 25 ई.सी. 1 लीटर से 1.5 लीटर प्रति हेक्टर या फेनवलरेट 20 ई.सी. या सायपर मेथ्रिन 25 ई.सी. 400 से 600 मि.ली. प्रति हेक्टर या इमामेकटीन बेन्जोएट 5 एस.सी. 100 ग्राम प्रतिहेक्टर एवं एण्डोक्साकार्ब 14.5 एस.एल. 600 मि.ली. प्रति हेक्टर की दर से छिडकाव करें।
§    एक हेक्टर क्षेत्र में छिडकाव के लिये विविध फसलो एवं उनकी अवस्थाओं के अनुरूप 500 से 1000 लीटर पानी सामान्य छिडकाव यंत्रो में लगता है। यदि आवश्यकता हो तो कीटनाशक दवाओ का उपयोग 10-15 दिन पश्चात पुनः किया जा सकता है।
इन बातों का ध्यान रखकर फसल को कीट से बचा सकते हैं।
क्रमांकः 55/014/55/वर्मा

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