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Thursday, 11 February 2021

‘‘एक भारत - श्रेष्ठ भारत‘‘ कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय वेबीनार सम्पन्न

 ‘‘एक भारत - श्रेष्ठ भारत‘‘ कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय वेबीनार सम्पन्न

खण्डवा 11 फरवरी, 2021 - कोरोना के विश्वव्यापी संकट के बीच प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को राष्ट्र के सामने रखा, जिसकी दौड़ में मध्यप्रदेश भी शामिल है । वर्ष 2023 तक का रखा गया रोडमैप मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भरता की नवीन ऊंचाई पर ले जाएगा और उसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका कृषि क्षेत्र की होगी । कृषि विकास में जैविक खेती एक नए अस्त्र के रूप में सिद्ध हो रहा है। यह विचार इंदिरा गांधी राष्ट्रीय केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय , अमरकंटक के प्रोफेसर डॉ . विनोद सेन ने श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय , खंडवा कीे ‘‘एक भारत - श्रेष्ठ भारत‘‘ इकाई द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार में व्यक्त किए । डॉ . सेन ने आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के मार्ग में आने वाली बाधाओं एवं चुनौतियों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डालते हुए , उसके समाधान पर भी अपने विचार व्यक्त किए । डॉ . सेन ने वेबिनार में बताया कि कोविड -19 वैश्विक महामारी के बाद मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना बहुत जरूरी है । 

डॉ. सेन ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की संभावनाओं एवं समस्याओं पर अपनी बात रखी, प्रदेश को गरीबी के दुष्चक्र और बेरोजगारी की बढ़ती समस्या , आय की आसमानता से निजात पर जोर दिया । प्रदेश को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना होगा एवं आय के नए साधन खोजने होंगे । उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का रास्ता आत्मनिर्भर गाँव से ही संभव है । अतः गांधीजी के ग्रामीण विकाश के सिद्धान्त को अपनाना होगा । डॉ . सेन ने कहा की प्रदेश के संतुलित विकास में पिछड़ों , आदिवासी और महिलाओं की भूमिका को सुनिश्चित करना होगा , तभी मध्यप्रदेश अगले एक दशक में आत्मनिर्भर बन सकेगा । 

  इस कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था प्राचार्य , डॉ . मुकेश जैन ने स्वागत भाषण देते हुए एक भारत- श्रेष्ठ भारत के महत्व को रेखांकित किया तथा मौजूदा सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से राष्ट्र की एकता से विकास के महत्व को परिभाषित किया । सेमिनार के दूसरे वक्ता के रूप में डॉ . विदुषी अमिटी , माधव विश्वविद्यालय , माउंट आबू , राजस्थान ने राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक अस्मिता के द्वारा आत्मनिर्भरता के विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। वेबीनार की तीसरे वक्ता डॉ . देवेंद्र मुजाल्दा , भूगोल विभाग अध्यक्ष , माधव विश्वविद्यालय , माउंट आबू , राजस्थान में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण में पर्यावरण एवं जल संवर्धन के योगदान को रेखांकित किया । उन्होंने स्पष्ट किया आज का मध्य प्रदेश पूरे भारत में सर्वाधिक जैव विविधता , जल संपन्नता एवं पर्यावरण की शुद्धता से युक्त है , जोकि आत्मनिर्भरता हेतु एक सकारात्मक पक्ष है । मध्य प्रदेश की पर्यावरणीय संपदा के आधार पर जन सामान्य को स्वरोजगार से जोड़ा जाना चाहिए तथा पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से पर्यटन को भी विकसित करने के अवसरों को खोजना चाहिए । 

वेबीनार के संयोजक प्रो . विकास वर्मा ने बताया कि इस वेबीनार के लिए भारत के विभिन्न राज्यों से लगभग 1700 प्रतिभागियों ने अपना पंजीयन करवाया । कार्यक्रम का संचालन वेबीनार के संयोजक प्रो विकास वर्मा ने किया । जबकि एक भारत श्रेष्ठ भारत की संकल्पना पर श्री अमित कुमार अब्राहम ने विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला । अंत में आभार डॉ भारती सेवतिया ने माना । वेबीनार के दौरान परामर्श दात्री समिति के डॉ एसपी सिंह , डॉ मनीष साकल्ले , डॉ कृष्णा सोलंकी , डॉ मनीषा सिंह , डॉ अविनाश दुबे , प्रो पी के पाटिल , डॉ टी आर ब्राह्मणे , प्रो चंद्रपाल सिंह रावत , डॉ रश्मि प्रभा फरे , डॉ आशुतोष तिवारी , प्रो प्रेमांश दुधे , प्रो अनिल पटेल आदि की गरिमामई उपस्थिति पूरे वेबीनार के दौरान रही । ऑनलाइन वेबीनार के सफल आयोजन हेतु प्रो अभिषेक शिंदे, प्रो क्षमा पालीवाल , प्रो अनुपमा पांडे , प्रो श्वेता दशोरे एवं श्री फैयाज ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

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