खुषियों की दास्ताँ
कलेक्टर श्रीमती सुन्द्रियाल की पहल पर दिव्यांग परिवार को मिली बेटरी वाली ट्राइसिकल
खण्डवा 5 मार्च, 2020 - जनसुनवाई में खण्डवा जिले के ग्राम गुयड़ा निवासी 13 वर्षीय बालक पूनमचंद अपनी दिव्यांग बहन माया, पिता गोविंद तथा मॉं कडूबाई को लेकर कलेक्ट्रेट आया और कलेक्टर श्रीमती तन्वी सुन्द्रियाल से बोला कि परिवार में 3 सदस्य दिव्यांग होने से परेषानियों का सामना दिन रात करना पड़ता है। उसने बताया कि विकलांगता के कारण ना तो पिता कोई व्यवसाय कर पाते है और न ही बहन माया स्कूल जा पाती है। यदि उसे कहीं से थोड़ी मदद मिल जाये और बेटरी युक्त ट्रायसिकल की व्यवस्था हो जाये तो उसके पिता अपना छोटा मोटा व्यवसाय चलाकर परिवार का पालन पोषण आसानी से कर सकेंगे। पिता कमाने लगेंगे तो परिवार का आर्थिक स्तर भी सुधरेगा और बहन स्कूल भी जाने लगेगी। कलेक्टर श्रीमती सुन्द्रियाल ने बालक पूनम की बात को गंभीरता से लेते हुए सामाजिक न्याय विभाग व अन्य विभागों से चर्चा की तो स्वचलित ट्रायसिकल का प्रावधान न होने की बात सभी ने कही। तब कलेक्टर श्रीमती सुन्द्रियाल ने आबकारी अधिकारी को बुलाकर दिव्यांग परिवार के लिए कहीं से स्वचलित ट्रायसिकल की व्यवस्था के लिए कहा।
जिला आबकारी अधिकारी श्री विजय सिंह सोलंकी ने कुछ ही दिनों में बेटरी युक्त ट्रायसिकल की व्यवस्था इस दिव्यांग परिवार के लिए कर दी। श्री सोलंकी ने बताया कि यह वाहन एक बार चार्ज करने पर 30 किलोमीटर आसानी से चल जाता है। उन्होंने बुधवार को जब दिव्यांग गोविंद को बुलवाकर उसे वाहन तथा वाहन के कागजात सौंपे तो उसकी खुषी का कोई ठिकाना न रहा। गोविंद ने बताया कि वह घर में एक छोटी सी दुकान संचालित करता है। उस दुकान के लिए सामान लाने ले जाने में उसे काफी परेषानी होती थी इस वाहन के मिल जाने से अब उसकी यह परेषानी दूर हो जायेगी और वह अपनी आय भी बढ़ा सकेगा और परिवार का बेहतर ढंग से पालन पोषण कर सकेगा।

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