खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए किसान भाई नई नई तकनीकों का उपयोग करें - विधायक श्री वर्मा
जिला स्तरीय 3 दिवसीय विज्ञान मेला प्रारंभ
खण्डवा 09 जून,2015 - तीन दिवसीय जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेले का आज विधिवत शुभारंभ स्थानीय पुरानी कृषि उपज मंडी प्रागंण में हुआ। इस कार्यक्रम में संबोधित करते हुए विधायक खण्डवा श्री देवेन्द्र वर्मा ने कहा कि प्रदेष सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए हर तरह से प्रयास कर रही है, खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए जरूरी है कि किसान भाई खेती की नई-नई तकनीको को अपनाये तथा खेती के साथ साथ पषुपालन, व उद्यानिकी जैसी गतिविधियांॅ भी अपनाये। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हसीना बाई भी उपस्थित थी। इसके अलावा विषेष अतिथि के रूप में विधायक पंधाना योगिता बोरकर, महापौर खण्डवा श्री सुभाष कोठारी, प्रभारी कलेक्टर श्री अमित तोमर, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक श्री हुकुमचंद यादव, अध्यक्ष कृषि उपज मंडी खण्डवा श्री आनंद मोहे एवं कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. मृदुला बिल्लौरे व अध्यक्ष कृषि स्थाई समिति श्री अषोक पटेल, भी उपस्थित थे। इस अवसर पर निजी कस्टम हायरिंग योजना के तहत श्री पुष्पेन्द्र मोर्य व श्री विषाल पालीवाल को 20-20 लाख रूपये की सहायता संबंधी प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर साधना उपाध्याय, के दल के कलाकरों ने गणेष वंदना व गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया। अतिथियों ने इस अवसर पर आयोजित कृषि विकास प्रदर्षनी का अवलोकन भी किया।
विधायक श्री वर्मा ने इस अवसर पर कहा कि यह किसानांे की मेहनत का ही फल है कि प्रदेष सरकार को देष में सर्वाधिक कृषि विकास दर के लिए तीन-तीन बार कृषि कर्मण पुरूस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि देष में केवल मध्य प्रदेष में ही कृषि के लिए अलग से केबिनेट गठित की गई है साथ ही कृषि का बजट भी अलग से तैयार होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों की सहायता के लिए खेत सड़क योजना, बलराम तालाब योजना, फीडर सेपरेषन योजना, जैसी अनेकों योजनाएं प्रारंभ की है, कृषि ऋण पर किसानों से ब्याज नही लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गत दिनों मुख्यमंत्री जी ने जिले के प्रवास के दौरान छैगॉंवमाखन, किल्लौद व सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजनाओं को प्रारंभ करने की घोषणा की थी जिससे जिले के हजारों किसानो को सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली मिल रही है।
विधायक पंधाना श्रीमती योगिता बोरकर ने इस अवसर पर किसानों से अपील की कि वे फसल चक्र अपनाये तथा अपने खेतो में बदल-बदल कर फसल लगाये। उन्होंने कहा कि खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए जरूरी है कि किसान पषुपालन भी करे तथा दुग्ध उत्पादन बढ़ाये। उन्होंने किसानों से कहा कि वे इस 3 दिवसीय कृषि मेले से नई - नई तकनीके सीखकर जाये तथा उन्हें अपने खेतों में अपनाये।
महापौर नगर निगम खण्डवा श्री सुभाष कोठारी ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेष में पहली बार किसान का बेटा मुख्यमंत्री बना है। अतः किसानों की भलाई के लिए प्रदेष सरकार विषेष प्रयास कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री षिवराज सिंह चौहान को किसानों के लिए देवदूत बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेष सरकार सड़क बिजली, पेयजल, जैसी मूलभूत सुविधाओं के क्षेत्र में तो बढ़ चढ़कर प्रयास कर रही है। साथ ही किसानों के लिए भी अनेको योजनाओं सरकार ने प्रारंभ की है।
प्रभारी कलेक्टर श्री अमित तोमर ने इस अवसर पर कहा कि खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए जरूरी है कि किसानों को खेती की नवीनतम तकनीकों की जानकारी हो, इसी उद्देष्य से सरकार ने कृषि विज्ञान मेले सभी जिलो में आयोजित किए है। साथ ही विकासखण्ड स्तर पर कृषक संगोष्ठियां आयोजित की जा रही है एवं गांव -गांव में कृषि क्रांति रथ भ्रमण कर किसानों को खेती के बारे मंे नई-नई जानकारियां दे रहे है। कृषि महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. बिल्लौरे ने अपने संबोधन में कृषि महोत्सव व कृषि विज्ञान मेले को किसानो के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन बताया। उन्हांेने कहा कि प्रदेष सरकार के प्रयासो से ही प्रदेष की तस्वीर बदल गई है, जो प्रदेष पहले बीमारू राज्य की श्रेणी में गिना जाता था अब वहीं मध्यप्रदेष लगातार तीन वर्ष सर्वाधिक कृषि विकास दर के लिए कृषि कर्मण पुरूस्कार प्राप्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए जरूरी है कि खेती की लागत को कम किया जाए। इसके लिए किसानो को जैविक पद्धति से खेती करना होगी तथा खेती के साथ - साथ पषुपालन, मछली पालन व उद्यानिकी जैसी गतिविधियां अपनानी होगी। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष श्री यादव ने कहा कि किसानों को खेती की मेढ़ो पर फलदार वृक्ष लगाने चाहिए तथा खेती की मिट्टी का परीक्षण कराकर प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार खाद व कीटनाषक का उपयोग करना चाहिए तथा मिट्टी के अनुरूप ही फसल लेनी चाहिए।
क्रमांक/45/2015/601/षर्मा




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