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Tuesday, 9 June 2015

रोजगार गारंटी योजना ने दिये खारकला पंचायत को विकास के नये आयाम

रोजगार गारंटी योजना ने दिये खारकला पंचायत को विकास के नये आयाम
कपिलधारा कूपों से गांव में हुआ सिंचाई सुविधा का विकास


खण्डवा 09 जून,2015 - आदिवासी बाहुल्य जनपद पंचायत खालवा की ग्राम पंचायत खारकला में वैसे तो विकास के कई कार्य हुये है परंतु मनरेगा योजना की उपयोजना कपिलधारा ने यहां के ग्रामीणों के जीवन स्तर में परिवर्तन की नई इबारते लिखी है। खारकला पंचायत में कपिलधारा उपयोजना अंतर्गत 56 कूप स्वीकृत किये गये है जिनमें से  अनुसूचित जनजाति के 27, अनुसूचित जाति के 15 एवं पिछडा वर्ग के 14 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। इन कपिलधारा कूपों से खारकलां पंचायत की लगभग 120 एकड भूमि में सिंचाई सुविधा का विकास हुआ है। इस उपयोजना का लाभ उन ग्रामीणों को हुआ है जिनके पास खेती के लिये भूमी तो थी परंतु सिंचाई सुविधा के अभाव में ये ग्रामीण खेती होते हुये भी श्रमिकों का जीवन व्यतीत करने को विवश थे। इनमें से अधिकतर हितग्राही केवल वर्षा आधारित फसल की पैदावार करते थे एवं शेष दिनों में मजदूरी कर जीवन यापन करते थे। कपिलधारा के हितग्राही मगन पिता मांगीलाल, रामकली पति मन्नु, बंशीलाला शंकर बताते है कि कपिलधारा कूप से सिंचाई सुविधा का विकास होने से आज वह सभी मौसम की फसल की पैदावार करने में सक्षम हये है एवं सम्पन्नता का जीवन व्यतीत कर रहे है। 
कपिलधारा के अतिरिक्त मनरेगा योजना की अन्य उपयोजनाओं अंतर्गत भी खारकला में उल्लेखनीय विकास कार्य हुये हैं, इस पंचायत में सुदूर ग्राम सड़क सम्पर्क उपयोजना अंतर्गत सड़क का निर्माण कराया गया है। पूर्व में मार्ग न होने के कारण लगभग 72 किसानो को उनके खेत में जाने के लिये नाले से होकर गुजरना पड़ता था व खेत से फसल लाने में अत्यंत परेशानी होती थी अब इस मार्ग के माध्यम से किसान खेत से फसल उनके घर तक सीधे पहुॅंचा लेते है। इसके अतिरिक्त खारकलां को मनरेगा की ग्रेवल रोड़ के माध्यम से समीपस्थ 4 गावों से जोड़ा गया है। मनेरगा अन्तर्गत ही पेयजल कूप का निर्माण कर खारकलां को पेयजल संकट से निजात दिलाई गई है। मनरेगा की एक अन्य हितग्राही मूलक उपयोजना पशुशेड का लाभ खारकलां के 5 हितग्राहीयो को दिया गया है। यह हितग्राही बताते है कि पूर्व में उन्हे पशुओं को खुले मे बांधना पढ़ता था जिससे पशुओं में बीमारी होने की आंशका बनी रहती थी एवं उनके मल-मूत्र के उचित निपटान न होने के कारण घरवालो को भी असुविधा होती थी। इस प्रकार मनरेगा योजना के माध्यम से खारकलां में न केवल ग्रामीणो के जीवन स्तर में परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया है साथ ही गांव की दशा और दिशा बदलने में भी यह योजना पूर्णतः उपयोगी साबित हुई है। 
   क्रमांक/49/2015/605/षर्मा

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