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Tuesday, 3 September 2019

जिला जेल में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता शिविर


जिला जेल में आयोजित हुआ विधिक साक्षरता शिविर

खण्डवा 3 सितम्बर, 2019 - अपर सत्र न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री बी.एल.प्रजापति की अध्यक्षता में मंगलवार को जिला जेल खण्डवा में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में द्वितीय अपर सत्र न्न्यायाधीश श्री तपेश कुमार दुबे, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चन्द्रेश मण्डलोई ,जेल अधीक्षक श्री प्रभात चतुर्वेदी , पैरालीगल वालेटियर्स श्री शेख मुजीब, श्री अखिलेश सोनी, श्री राहुल राठवे उपस्थित थे। इस शिविर में सचिव व अपर सत्र न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री प्रजापति ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नही होता कभी कभी परिस्थितिवश व्यक्ति से अपराध हो जाता है जिस कारण यहॉ जो भी बंदी है वह यहॉ से जाने के बाद कोई भी ऐसा दोबारा कोई काम नही करे जिससे कि यहॉ वापिस आना पड़े। जेल को बंदी पश्चाताप् गृह माने तथा यहॉ से निकलकर समाज की मुख्यधारा में जुड़कर अपने परिवार व समाज और देश के विकास में योगदान दंे एवं यहॉ से जाने के बाद कोई विधि विरूद्ध कार्य न करे। साथ ही उनके द्वारा बंदियों को प्ली बार्गेनिंग योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना का लाभ ऐसे अपराध में मिलता है जिसमें कि सात वर्ष से अधिक की सजाा का प्रावधान न हो और इस योजना का लाभ केवल एक बार ही लिया जा सकता है। साथ ही इस योजना से लिये गये लाभ का व्यक्ति के चरित्र सत्यापन में कोई गलत प्रभाव नही पड़ता है साथ ही उनके द्वारा बंदीयों को कानून की विभिन्न जानकारी दी गयी। 
         इस अवसर पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री तपेश कुमार दुबे ने बताया कि कभी कभी व्यक्ति से अपराध परिस्थितिवश हो जाता है उसकी मंशा अपराध करने की नही होती यदि उसे उचित सलाह प्राप्त हो जाती तो शायद वह अपराध करने से बच जाता विधिक सेवा का एक उद्देश्य यह भी है कि व्यक्ति को उचित सलाह दी जावे जिससे कि वह अपराध से बच सके। साथ ही उनके द्वारा बंदियों से कहा कि वह अपना आचरण व व्यवहार ऐसा रखे जिसे कि यहॉ से जाने के बाद दोबारा वापिस यहॉ न आना पड़े साथ ही उनके द्वारा बंदियों को विभिन्न कानून की जानकारी दी गयी ।  
       इस दौरान जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चन्द्रेश मण्डलोई ने कहा कि भारतीय कानून प्रतिशोधात्मक न होकर सुधारात्मक प्रवृत्ति का है, यह बंदीयों को सुधार का अवसर प्रदान करता है। साथ ही उनके द्वारा बंदियों को जिला विधिक सेवा प्रााधिकरण द्वारा बंदीयों के हितों की सुरक्षा आदि के संबंध में किये जाने वाले कार्यो की जानकारी देते हुए बंदीयों को साधारण अपराध व गंभीर अपराध के बारे में बताते हुए जमानती व अजमानती अपराध के संबंध में बताया गया एवं कहा कि जो बंदी अपने प्रकरण में अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ है उस बंदी को विधिक सेवा द्वारा नियमानुसार निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का कार्य भी विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया जाता है। 

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