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Tuesday, 15 January 2019

मीजल्स-रूबेला अभियान के तहत बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ कलेक्टर श्री गढ़पाले ने भण्डारी स्कूल में किया अभियान का शुभारंभ

मीजल्स-रूबेला अभियान के तहत बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ
कलेक्टर श्री गढ़पाले ने भण्डारी स्कूल में किया अभियान का शुभारंभ

खण्डवा 15 जनवरी, 2019 - मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान के तहत जिले के आंगनवाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में 9 माह से 15 वर्ष तक के बच्चों के टीकाकरण का कार्य मंगलवार सुबह से प्रारंभ हो गया। कलेक्टर श्री विशेष गढ़पाले ने भण्डारी पब्लिक स्कूल पहुंचकर इस अभियान के तहत अपनी बेटी कु. शिवोही को टीका लगवाया। इस दौरान उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों व शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस अभियान के तहत पूर्णतः निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है, जबकि ये टीके पूर्व में निजी अस्पतालों में एक बड़ी धनराशि खर्च करने के बाद लगते थे।  उन्होंने सभी पालकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को यह टीका आवश्यक रूप से लगवायें। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. रतन खंडेलवाल, जिला टीकाकरण अधिकारी डाॅ. अनिल तंतवार, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. एन.क.े सेठिया, स्कूल संचालक नीरज भण्डारी, उपस्थित थे। 
मीजल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान 28 फरवरी 2019 तक जारी रहेगा। जिले में मीजल्स-रूबेला वैक्सीन टीका 4 लाख 24 हजार 810 बच्चों को लगाने का लक्ष्य है, जिसमें खण्डवा शहरी क्षेत्र के 53,822 बच्चें खण्डवा ग्रामीण 40,992, पुनासा 69,073, पंधाना 80,981, छैगावंमाखन 43,977, खालवा 90,079, हरसूद 32,630 तथा किल्लौद के 13,257 बच्चंे शामिल है। प्रथम चरण में सरकारी व प्रायवेट स्कूलों तथा मदरसों में विद्यार्थियों को यह टीका लगाये जायें। इसके पश्चात् सभी आंगनवाड़ी केन्द्र में दर्ज बच्चों, मंजरे-टोले, ईट भट्टों व अन्य छूट गए बच्चों का टीकाकरण कार्य किया जायेगा। जिला टीकाकरण अधिकारी डाॅ. अनिल तंतवार ने बताया मिजल्स-रूबेला का टीका दर्द रहित है इसे लगाने से किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आती है। उन्होंने बताया कि अभियान से पूर्व जिन बच्चों को लग चुका है उन्हें भी इस विशेष अभियान के तहत फिर से टीका लगवाना होगा। उन्होंने बताया कि खसरा एक जानलेवा बीमारी है इस रोग से ग्रषित होने पर बच्चों को दस्त रोग, निमोनिया, कुपोषण और अंधापन जैसी समस्याएं होती हैं एवं बच्चों की मृत्यु तक भी हो सकती है। डाॅ. तंतवार ने इस अवसर पर बताया कि रूबेला नामक बीमारी मुख्यतः 15 वर्ष तक के बच्चों में होने की संभावना सर्वाधिक होती है।        

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