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Wednesday, 4 September 2019

सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए उपयोगी सलाह

सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए उपयोगी सलाह

खण्डवा 4 सितम्बर, 2019 - वर्तमान मेें सोयाबीन फसल पर चने की इल्ली के साथ सेमीलूपर की दूसरी पीढ़ी की इल्लियों का प्रकोप देखने में आ रहा है। उपसंचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने बताया कि इनके नियंत्रण हेतु क्वीनॉलफॉस 25 ईसी 1500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा इन्डोक्साकार्ब 14.5 एससी 300 मि.ली. प्रत हेक्टेयर अथवा फ्लूबेन्डीयामाइड 39.935 एससी 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर का छिड़काव फसल पर किया जा सकता है। इसके अलावा सोयाबीन फसल के इल्लियों से बचाव के लिए फ्लूबेन्डीयामाईड 20 डब्ल्यूजी 250 से 300 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा स्पायनोटेरम 11.7 एससी 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरएन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 एस.सी. 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर का 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर के साथ छिड़काव भी किया जा सकता है। उपसंचालक कृषि श्री गुप्ता ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों के साथ साथ सफेद मक्खी का भी प्रकोप देखा गया है। इनके नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाश बीटासायफ्लूथीन व इमिडाक्लाप्रीड 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा थायमिथाक्सॅम व लेम्बडा सायहेलोथ्रीन 125 मि.ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है, जिससे तना मक्खी का भी नियंत्रण होगा। 
उपसंचालक कृषि श्री गुप्ता ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल में माइरोथिसियम लीफ स्पॉट, एन्थ्रकनोज, एरियल ब्लाइट एवं चारकोल रॉट बीमारी का प्रकोप देखा गया है। इसके नियंत्रण के लिए कृषको को सलाह है कि फसल पर टेबकोनाझोल 625 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा टेबकोनाझोल व सल्फर 1 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर अथवा हेक्साकोनाझोल 500 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा पायरोक्लोस्ट्राबिन 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर को 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। गर्डल बीटल के नियंत्रण के लिए उन्होंने थाईक्लोप्रीड 21.7 एससी 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा प्रोफेनोफॉस 50 ईसी में 125 लीटर प्रति हेक्टेयर या ट्रायझोफॉस 40 ईसी में 800 मि.ली. प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी है। श्री गुप्ता ने बताया कि पीला मोजाइक बीमारी को फैलाने वाली सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए खेत में याले स्टीकी ट्रेप का प्रयोग करें जिससे मक्खी के वयस्क नष्ट किये जा सके। साथ ही पीला मोजाइक रोग से ग्रसित पौधों व अवशेषो को खेत से निकालकर नष्ट कर दे। रोग की तीव्रता अधिक होने पर थायोमिथाक्सम 25 डब्ल्यूजी 100 ग्राम प्रति 500 लीटर पानी का छिड़काव करें। बीज उत्पादन के लिए उगाई जाने वाली सोयाबीन की फसल में पत्तियों, फूल का रंग एवं रोए के रंग के आधार पर अन्यय किस्मों के पौधो को निकाल दें जिससे बीज की शुद्धता बनी रहे। उन्होंने बताया कि लगातार होने वाली वर्षा के कारण जलभराव की स्थिति होने पर अतिरिक्त पानी के निकास हेतु नालियांे की व्यवस्था करें। 

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