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Wednesday, 14 August 2019

आदिवासी परिवारों को साहूकारी कर्ज से मुक्ति दिलाई जायेगी

आदिवासी परिवारों को साहूकारी कर्ज से मुक्ति दिलाई जायेगी
जनाधिकार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री नाथ ने सभी को दी स्वतंत्रता दिवस की बधाई

खण्डवा 14 अगस्त, 2019 - राज्य सरकार अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों को गैर लाइसेंसी साहूकारों के कर्ज से मुक्ति देने के लिये अध्यादेश लायेगी। इस संबंध में मंगलवार को भोपाल में आयोजित जनाधिकार कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों की जानकारी कलेक्टरों को दी गई। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने इस दौरान कलेक्टरों को निर्देश दिए कि मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान सिर्फ बड़े जिलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे सभी जिलों में सघनता से चलायें, जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। नई कार्य-संस्कृति विकसित करनी होगी। लापरवाही और ढिलाई प्रदेश के हित में नहीं है। इसलिये सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ‘‘आपकी सरकार-आपके द्वार‘‘ कार्यक्रम में जनता से जिलों के प्रशासन का फीडबैक मिलता रहता है। उन्होंने कहा कि जिलों में यह सुनिश्चित करें कि अधिकारी आम जनता के लिये उपलब्ध रहें। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अधिकारियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ दी।
आदिवासियों से जबरन कर्ज वसूली करने पर 3 साल की सजा व 1 लाख रू. तक जुर्माना होगा
           मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने बताया कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय परिवारों पर साहूकारी ऋण विमुक्ति अध्यादेश लाया जायेगा। इसके अनुसार 15 अगस्त 2019 तक जनजातीय बंधुओं पर साहूकारों के जितने कर्ज हैं सबसे उन्हें मुक्ति मिल जाएगी। उनकी गिरवी रखी सम्पत्ति भी उन्हें वापस मिल जाएगी। ऐसे परिवारों पर जो बकाया कर्ज है उसकी जबरन वसूली करने पर सजा और जुर्माना होगा। तीन साल की सजा होगी और एक लाख रूपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा। उन्होंने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिये गये हैं कि वे अपने जिलों के अनुसूचित क्षेत्रों में ऐसे जनजातीय परिवारों और साहूकारों पर नजर रखें। कोई भी साहूकार जबर्दस्ती कर्ज वसूली न कर पाये। ऐसे गैर लाइसेंसी साहूकारों की जानकारी भी मंगाई जा रही है। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने इस दौरान बताया कि मध्यप्रदेश अनुसूचित क्षेत्रों में साहूकारी विनियम 1972 में संशोधन का अध्यादेश भी राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिये भेजा जा रहा है। आगामी दिनों में अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने का अभियान चलाया जायेगा। जन-धन खातों में ओवरड्राफ्ट की सुविधा का लाभ उठाने के लिये प्रेरित किया जायेगा। इसके बारे में पूरी जानकारी दी जायेगी। आदिवासी परिवारों को रुपे कार्ड जारी किये जायेंगे। यदि पहले से उनके पास हैं और क्रियाशील नहीं हैं तो उन्हें क्रियाशील बनाया जायेगा।

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