28 अगस्त से सभी विकासखण्डों में 1-1 ऑगनवाड़ी शिक्षा केन्द्र शुरू होंगे
खण्डवा 14 अगस्त, 2019 - प्रदेश में प्रत्येक विकास खण्ड के एक ऑगनवाड़ी केन्द्र को बाल शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रथम चरण में 28 अगस्त को चयनित 313 ऑगनवाड़ी केन्द्रों में बाल शिक्षा केन्द्र शुरू किया जा रहा है। इस संदर्भ में महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती इमरती देवी की अध्यक्षता में ई.सी.सी.ई. परिषद का गठन किया गया है। विभागीय प्रमुख सचिव को परिषद की कार्यकारी समिति का अध्यक्ष मनोनीत किया गया है। आयुक्त महिला-बाल विकास श्री एम.बी.ओझा ने बताया कि प्रदेश में बाल शिक्षा केन्द्रों का शुभारंभ 28 अगस्त को किया जाएगा। इस संबंध में रेगुलेटरी दिशा-निर्देश तैयार किये जा रहे है।
बाल शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से प्रदेश में शासकीय एवं निजी क्षेत्रों में 6 वर्ष की उम्र तक के बच्चों के समुचित विकास के लिये प्री-प्रायमरी संस्थाओं का नियमन, निगरानी एवं मूल्यांकन संभव होगा। प्रदेश स्तर पर भी शाला पूर्व शिक्षा नीति तथा नियामक दिशा-निर्देश बनाये जा रहे हैं। ऑगनवाड़ी केन्द्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों कों स्वयं की पहचान, मेरा घर, व्यक्तिगत साफ-सफाई, रंगों और आकृति, तापमान एवं पर्यावरण, पशु-पक्षी, यातायात के साधन और सुरक्षा के नियम, हमारे मददगार मौसम और बच्चों का आत्म-विश्वास तथा हमारे त्यौहार जैसे विषयों की जानकारी व शिक्षा दी जायेगी। बाल शिक्षा केन्द्र में 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों के लिये आयु समूह के अनुसार 3 एक्टीविटी वर्क बुक तैयार की गई है। बच्चों के विकास की निगरानी के लिये शिशु विकास कार्ड बनाये गये हैं।
ऑगनवाड़ी केन्द्रों में खेलों के आधार पर बच्चों से अलग-अलग गतिविधियाँ करवाई जायेंगी। इन केन्द्रों में प्रतिदिन 3 से 4 घन्टे शाला पूर्व शिक्षा के लिये निर्धारित हैं। बच्चों को एक गतिविधि के लिये 15 से 20 मिनिट का समय निर्धारित किया गया है क्योंकि 3 से 6 तक की उम्र वर्ष के बच्चे एक गतिविधि पर इससे अधिक समय तक ध्यान नहीं दे पाते।
बच्चों को आकर्षित करने के लिये ऑगनवाड़ी बाल शिक्षा केन्द्र में रंग-बिरंगी साज- सज्जा की जाएगी। कक्ष में दीवारों पर चार्ट, पोस्टर, कटआऊट आदि लगाये जायेंगे। बच्चों द्वारा बनाई गई सामग्री का भी प्रदर्शन किया जायेगा। आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों के खेलने के लिये अलग-अलग कोने जैसे गुडिया घर का कोना, संगीत का कोना, कहानियों का कोना, विज्ञान एवं पर्यावरण प्रयोग का कोना आदि बनाए गए हैं।
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