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Thursday, 10 January 2019

हमारी लड़ाई आर्थिक बदहाली, कुपोषण, घटते रोजगार अवसर और कम होते निवेश से है

मुख्यमंत्री जी का ब्लॉग

हमारी लड़ाई आर्थिक बदहाली, कुपोषण, घटते रोजगार अवसर और कम होते निवेश से है

खण्डवा 10 जनवरी, 2019 -  
‘‘इस लड़ाई में हम कामयाब होंगे, कठोर डगर की विरासत पर
सधे हुए कदमों से बढ़ेंगे हम, पूरे हौसले से सारी कठिनाइयों से लड़ेंगे हम ,
सुशासन की एक-एक सीढ़ियाँ गढ़ेंगे, और कदम-दर-कदम,
उस पर चढ़ेंगे हम, चढ़ेंगे हम,‘‘
मैं ये मानता हूँ कि हमारे सामने आर्थिक संदर्भों में कई चुनौतियाँ हैं, मगर चुनौतियों को अवसर में बदलने का नाम ही मध्यप्रदेश है। हम इस कठोर डगर पर सधे हुए कदमों से चलेंगे। हम जानते हैं कि बीते 15 वर्ष के इतिहास की गलतियों से सबक नहीं लेंगे तो भविष्य हमें माफ नहीं करेगा। हमारी मान्यता है कि किये हुए काम अपना प्रचार खुद करते हैं, इसलिए हम सिर्फ कोरी घोषणाओं से बचें और अपना सारा ध्यान काम पर लगाएँ।
मध्यप्रदेश के नागरिकों ने नई सरकार को बदलाव के लिये चुना है। ये बदलाव सुशासन के लिये है। बीते 24 दिनों में बदलाव की पदचाप सुनाई देने लगी है। हम सरकार में से श्मैं और मेरीश् हटाकर श्हमारी सरकारश् की भावना स्थापित करना चाहते हैं। अब हर नागरिक गर्व से कह सकता है, श्मैं भी सरकार हूँश्। हम सही मायने में सत्ता की कमान प्रदेश के नागरिकों को सौंपना चाहते हैं। विश्वास मानिए, जब भी सत्ता श्व्यक्ति केंद्रितश् होती है, तो प्रजातंत्र को नुकसान पहुँचता है। इसमें सामूहिकता का बोध होना चाहिए। पक्ष, प्रतिपक्ष और जनता, सबका दायित्व प्रजातंत्र ने निर्धारित किया है। हमारी मान्यता है कि सरकार ठीक काम करे, इसके लिये प्रतिपक्ष मजबूत और जिम्मेदार होना चाहिये।
मैं ये साफ कर देना चाहता हूँ कि हमारी लड़ाई प्रतिपक्ष के खिलाफ नहीं है। हम सब मिलकर मध्यप्रदेश की आर्थिक बदहाली, कुपोषण, अपराध, घटते रोजगार के अवसर और कम होते औद्योगिक निवेश के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे और कामयाब होंगे। हमारी प्राथमिकता में नागरिकों का स्वास्थ्य, शिक्षा और अधोसरंचना भी है। हमारे अन्नदाता भाइयों को कठिनाइयों से उबारना है। कर्ज माफी स्थाई समाधान नहीं है। उनकी बहुत बड़ी अपेक्षाएँ नहीं हैं। वो सिर्फ अपनी फसलों के दाम चाहते हैं,ये हमें सुनिश्चित करना होगा।
भारतीय सनातन संस्कृति से बेटियाँ देवियों का स्वरूप हैं। उनसे प्रेरणा ली गई है। आज क्या हम उन्हें प्रताड़ित होने दें ? कतई नहीं। उनके सशक्तिकरण के लिए कदम उठा रहे हैं। उनके ससुराल जाने के वक्त 51 हजार रु. देकर पिता का फर्ज निभा रहे हैं। बेटियाँ खुशी मनाती हैं, तो तरक्की मुस्कुराती है। प्रदेश का उज्जवल भविष्य युवाओं में निहित है। अगर उनको अवसर प्रदान किये जाएंगे, तो हम तरक्की की पायदान चढ़ते जाएंगे। ये तब ही संभव है जब मध्यप्रदेश में निवेश हो और वो सिर्फ बड़े आयोजनों से आकर्षित नहीं होगा। बड़े कदम उठाने की जरूरत है। लाल फीता शाही खत्म कर लाल कारपेट बिछाने होंगे। गौ माता के लिए गौ शाला हो, भगवान राम का वनगमन पथ या नर्मदा जैसी शास्त्रीय नदियों की अविरलता हो, हम अपने वचन-पत्र के प्रति पूरी प्रतिबद्धता से काम करेंगे।
हम गर्व से कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश देश का वो राज्य है जहाँ सबसे ज्यादा आदिवासी भाई रहते हैं और प्रदेश के विकास में भरपूर साथ देते हैं। अब बारी हमारी है उनका साथ निभाने की, उनकी खुशियाँ उन्हें लौटाने की। अनुसूचित जाति, सामान्य वर्ग, हर वर्ग के हाथों में लेकर हाथ चलेंगे। हम सब साथ साथ करेंगे ‘‘सिर्फ और सिर्फ सुशासन के लिए बदलाव की बात।‘‘ मैं जब से चला हूँ, मेरी मंजिल पर निगाह है। आज तक मैंने मील का पत्थर नहीं देखा।

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