दस्तक अभियान का जिला स्तरीय प्रषिक्षण सम्पन्न
आंगनवाड़ी, आषा और स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर देंगे दस्तक
खण्डवा 10 जुलाई, 2021 - दस्तक अभियान का आयोजन 19 जुलाई से 18 अगस्त 2021 तक किया जायेगा। अभियान के तहत् स्वास्थ्य विभाग एवं महिला बाल विकास के संयुक्त दल जिसमें एन.एन.एम. आशा एवं आंगनवाड़ी व्दारा 5 वर्ष से छोटे बच्चों वाले परिवारों में घर पर स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की दस्तक दी जाकर बच्चों में पाई जाने वाली बीमाारियों की सक्रिय पहचान एवं उचित प्रबंधन सुनिष्चित करेंगे। अभियान के क्रियान्वयन के लिये 10 जुलाई को जिला स्तरीय प्रषिक्षण सिविल सर्जन सभागृह में संपन्न हुआ। प्रषिक्षण में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.डी.एस. चौहान, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बालविकास व्ही.पी.एस. राठौर, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनिल तंतवार तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. षिवराजसिंह चौहान ने प्रषिक्षण मंे उपस्थित खण्ड स्तरीय अधिकारीयों को पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेषन के माध्यम से प्रषिक्षण दिया। प्रषिक्षण में जिले के समस्त खण्ड चिकित्सा अधिकारी, सी.डी.पी.ओ. मौजूद रहे।
प्रषिक्षण में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.एस. चौहान ने समस्त विकासखण्ड स्तरीय अधिकारीयों को अपने विकासखण्ड में मैदानी कार्यकर्ताओं को प्रषिक्षित करने एवं अभियान को सफल बनाने के निर्देष दिये। आपने कहा कि समस्त मैदानी कार्यकर्ता कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए घर-घर दस्तक दें। अभियान में जन्म से पांच वर्ष तक के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय रूप से पहचान एवं प्रबंधन करना, छः माह से पांच वर्ष तक के बच्चों में गंभीर एनिमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन करना, नौ माह से पांच पांच वर्ष के समस्त बच्चों का विटाामीन ए अनुपूरण करना, पांच वर्ष तक के बच्चों में बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान एवं रेफरल करना, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चें में बाल्यकालीन दस्त रोग के नियंत्रण हेतु ओ.आर.एस. के उपयोग संबंधी सामुदायिक जागरूकता में बढ़ावा एवं प्रत्येक घर में गृहभेंट के दौरान ओ.आर.एस. पहुॅंचाना, गृहभेंट के दौरान आंशिक रूप से टीकाकृत एवं छूटे हुये बच्चों की जानकारी लेना, शिशु एवं बाल आहारपूर्ति संबंधी समझाइश समुदाय को देना एवं स्तनपान संबंधी भ्रांतियों में कमी हेतु सामुदायिक जागरूकता लाना, कम वज़न के नवजात शिशुओं की उचित देखभाल हेतु समुदाय में कंगारू मदर केयर पद्धति संबंधी जागरूकता, एस.एन.सी.यू. एवं एन.आर.सी. से छुट्टी प्राप्त बच्चों में बीमारी की स्क्रीनिंग एवं फॉलो-अप को प्रोत्साहन, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों की पहचान की जायेगी।

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