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Thursday, 15 July 2021

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की मदद से महेश ने हार्डवेयर व बिल्डिंग मटेरियल का व्यवसाय प्रारंभ किया

 सफलता की कहानी

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की मदद से 

महेश ने हार्डवेयर व बिल्डिंग मटेरियल का व्यवसाय प्रारंभ किया

खण्डवा 15 जुलाई, 2021 - खण्डवा जिले के पंधाना तहसील के ग्राम बोरगांव बुर्जुग निवासी महेश पटेल के पास खेती का पर्याप्त रकबा होने के कारण खेती की ओर उसका रूझान रहा और लंबे समय तक अपनी देखरेख में खेती करवाता रहा। महेश का मानना है कि खेती से अच्छी आमदनी होती थी किन्तु एक रूझान स्वयं के व्यवसाय की ओर भी था। अपने अन्य मित्रों से प्रेरित होने के कारण स्वयं का व्यवसाय उसे आकर्षित करता रहा। सोचा खेती के साथ साथ स्वयं का व्यवसाय भी समानांतर करूं। स्वयं का व्यवसाय करने के लिए आर्थिक सक्षमता तो थी किन्तु व्यवसाय के लिए जिस पैमाने पर आर्थिक व्यवस्था की जाना थी उतनी व्यवस्था करने के लिए शासन की योजनाओं से सहायता ली जाए। अधिक राशि की व्यवस्था को मूल कारण यह था कि महेश अपने कस्बे की मांग के अनुरूप हार्डवेयर एवं बिल्डिंग मटेरियल का व्यवसाय करना चाहता था। इसी बीच महेश को मध्यप्रदेश शासन की मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। इसकी विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए महेश ने जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र खण्डवा से संपर्क किया। 

जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र खण्डवा से प्राप्त जानकारी के आधार पर महेश ने पूर्व से सोचे गए व्यवसाय हार्डवेयर एवं बिल्डिंग मटेरियल के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ऑनलाईन आवेदन किया। महेश का प्रकरण निर्धारित समय सीमा में जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र खण्डवा की कार्यालयीन प्रक्रियाओं के पश्चात बैंक ऑफ इंडिया बोरगांव बुजूर्ग की ओर अग्रेषित किया गया। बैंक की प्रारंभिक औपचारिकताओं के पश्चात महेश की मांग के अनुसार उसे ऋण आसानी से उपलब्ध हो गया है। महेश ने अपना स्वयं का व्यवसाय बोरगांव बुजूर्ग में प्रारंभ किया है। इस व्यवसाय में अपेक्षानुरूप आय हो रही है। समय पर बैंक की किश्त का भुगतान करने के बाद अच्छी आमदनी भी हो रही है। महेश को इस व्यवसाय में अभी और विस्तार की संभावना दिखाई दे रही है। उसे अच्छी आमदनी होने का मूल कारण यह है कि स्वयं के कस्बे के साथ ही आसपास के गांवों से भी क्रेता आते है जिन्हें उचित दाम पर आसानी से आवश्यकता अनुसार सामग्री उपलब्ध हो जाती है। पहले जरूरतमंदों को पंधाना या खण्डवा तक जाना पड़ता था। शासन की इस योजना से महेश को व्यवसाय मिला ही साथ ही जरूरतमंदों को उनकी जरूरत के अनुसार सामग्री स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होने लगी। 

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