हिंसा प्रभावित पीडि़त महिलाओं की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश
अब वनस्टॉप सेंटर में पीडि़त महिला के वीडियो व फोटो खीचनें पर रहेगा सख्त प्रतिबंध
खण्डवा 20 जुलाई, 2020 - अब हिंसा प्रभावित प्रकरणों में महिला के नाम, पहचान, अभिलेखों की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित किया गया है कि पोस्को अधिनियम के अंतर्गत लैंगिक हिंसा से उत्तरजीवी महिला, बालिका तथा अन्य हिंसा प्रभावित के नाम या उनसे संबंधित कोई अन्य तथ्य जिससे महिला की पहचान उजागर होना संभावित हो, को प्रिंट, इलेक्ट्रानिक या सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए अब वन स्टॉप सेंटर के परिसर में किसी भी पीडि़त की तस्वीर अथवा वीडियोग्राफी प्रतिबंधित होगी। महिला को व्यक्तिगत जानकारी या उसके निवास की जानकारी मीडिया को नहीं दी जायेगी। इसके अलावा किसी भी इलेक्ट्रानिक, प्रिंट मीडिया के साथ बातचीत की अनुमति सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही दी जायेगी। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह निर्णय भी लिया गया है कि भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376 व इससे जुड़ी अन्य धाराओं के तहत की गई एफआईआर के अपराधों की जानकारी पब्लिक डोमेन पर पोस्ट नहीं की जाएगी।
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