पाँचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों का होगा बाह्य मूल्याकंन
दूसरे स्कूल के शिक्षक परखेंगे वार्षिक मूल्यांकन की कॉपियाँ
खंडवा (17 जनवरी, 2014) - मध्यप्रदेश की शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में होने वाले वार्षिक मूल्याकंन में अब कक्षा पाँचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों की उपलब्धियों का बाह्य मूल्यांकन किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद से कक्षा आठवीं तक परीक्षाओं पर बंदिश लगाते हुए सतत मूल्याकंन की व्यवस्था लागू की गई है। इसमें बच्चों को पास फेल के भय से मुक्ति दिलाते हुए कक्षा आठवीं तक अपनी प्रारंभिक शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के अवसर दिये गये हैं। इस व्यवस्था से परीक्षा के अभाव में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सतत मूल्यांकन होगा। यह मूल्याकंन मासिक और वार्षिक आधार पर किये जाते हैं। इसमें स्कूल के शिक्षक ही बच्चों की दक्षताओं और उपलब्धियों का आकलन कर योग्यता अनुसार उन्हें ग्रेड देकर अगली कक्षा में प्रमोट करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने मूल्याकंन की इस प्रक्रिया को गुणवत्ता की दृष्टि से पारदर्शी बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया। परिपालन में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस चंद्र जैन द्वारा कक्षा पाँचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों की वार्षिक मूल्याकंन की कॉपियों का परीक्षण बाह्य मूल्यांकन विधि से करवाने का निर्णय लिया है। अब कक्षा पाँचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों का मूल्यांकन कार्य उसी स्कूल के शिक्षक नहीं करेंगे। एक स्कूल के शिक्षकों द्वारा दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों की परीक्षा कॉपियों का परीक्षण किया जाएगा। मूल्याकंनकर्ता वरिष्ठ कक्षाओं के शिक्षक होंगे। पाँचवीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्याकंन छठवीं और उससे बड़ी कक्षाओं के शिक्षक करेंगे। ऐसी ही व्यवस्था आठवीं के मूल्याकंन में की जायेगी। इससे इन कक्षाओं के मूल्यांकन में अध्यापकीय गुणवत्ता और शिक्षार्थी उपलब्धियों का सटीक परीक्षण किया जा सकेगा।
निर्णय पर इसी शैक्षणिक सत्र के वार्षिक मूल्यांकन से अमल के लिये विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुधीर रंजन मोहंती ने सभी जिलों के कलेक्टर्स के साथ ही मैदानी अमले को निर्देशित किया हैं।
उल्लेखनीय है कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद से कक्षा आठवीं तक परीक्षाओं पर बंदिश लगाते हुए सतत मूल्याकंन की व्यवस्था लागू की गई है। इसमें बच्चों को पास फेल के भय से मुक्ति दिलाते हुए कक्षा आठवीं तक अपनी प्रारंभिक शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने के अवसर दिये गये हैं। इस व्यवस्था से परीक्षा के अभाव में बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सतत मूल्यांकन होगा। यह मूल्याकंन मासिक और वार्षिक आधार पर किये जाते हैं। इसमें स्कूल के शिक्षक ही बच्चों की दक्षताओं और उपलब्धियों का आकलन कर योग्यता अनुसार उन्हें ग्रेड देकर अगली कक्षा में प्रमोट करते हैं।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने मूल्याकंन की इस प्रक्रिया को गुणवत्ता की दृष्टि से पारदर्शी बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया। परिपालन में स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस चंद्र जैन द्वारा कक्षा पाँचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों की वार्षिक मूल्याकंन की कॉपियों का परीक्षण बाह्य मूल्यांकन विधि से करवाने का निर्णय लिया है। अब कक्षा पाँचवीं और आठवीं के विद्यार्थियों का मूल्यांकन कार्य उसी स्कूल के शिक्षक नहीं करेंगे। एक स्कूल के शिक्षकों द्वारा दूसरे स्कूल के विद्यार्थियों की परीक्षा कॉपियों का परीक्षण किया जाएगा। मूल्याकंनकर्ता वरिष्ठ कक्षाओं के शिक्षक होंगे। पाँचवीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्याकंन छठवीं और उससे बड़ी कक्षाओं के शिक्षक करेंगे। ऐसी ही व्यवस्था आठवीं के मूल्याकंन में की जायेगी। इससे इन कक्षाओं के मूल्यांकन में अध्यापकीय गुणवत्ता और शिक्षार्थी उपलब्धियों का सटीक परीक्षण किया जा सकेगा।
निर्णय पर इसी शैक्षणिक सत्र के वार्षिक मूल्यांकन से अमल के लिये विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुधीर रंजन मोहंती ने सभी जिलों के कलेक्टर्स के साथ ही मैदानी अमले को निर्देशित किया हैं।
क्रमांकः 89/2014/89/वर्मा
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