बर्ड फ्लू के संबंध में पशु चिकित्सा विभाग ने एडवाइजरी जारी की
खण्डवा 9 जनवरी, 2021 - उप संचालक पशु चिकित्सा डॉ. राजू रावत ने पक्षियों में बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा नामक बीमारी के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए नागरिकों को सलाह दी है कि पक्षियों में संक्रमण फैलने की आशंका होने से नदी, तालाब, कुएं, बावड़ी, नहर या अन्य जल स्त्रोत के आसपास पक्षी, पक्षियों की मृत्यु होती है तो तुरंत समीपस्थ पशु चिकित्सा संस्था के अधिकारियों या कर्मचारियों को सूचित करें तथा मृत पक्षी से पर्याप्त दूरी बनाये रखें। उन्होंने बताया कि पक्षियों में फैलने वाले संक्रमण से बचाव के लिए निम्नलिखित सांवधानियां बरती जाना चाहिए, तथा पक्षी को ग्लब्स व मॉस्क पहनकर उठावें तथा प्लास्टिक कोट अथवा एप्रीन का उपयोग करे। मृत पक्षी को इधर उधर ना फेंके, बल्कि उसे गड्ढा खोदकर जमीन में गाड़ देवंे तथा उस पर चूना पावडर डालकर कांटे डाल देवे ताकि मृत व संक्रमित पक्षी को कोई जानवर न खा सकें।
उप संचालक डॉ. रावत ने नागरिकों को सलाह दी है कि यदि कही पर मुर्गीयॉं बीमार पाई जाती है उन्हें स्वस्थ मुर्गियों से अलग कर लेवें व पशु चिकित्सक से उनका इलाज करावे। जो ग्लब्स मुर्गियों या पक्षियों को पकड़नें में उपयोग हुए हो उनका दोबारा इस्तेमाल न करें तथा उन्हें भी जमीन में गाड़़ देवंे। मुर्गी या किसी भी बीमार पक्षी के सम्पर्क में आने पर अच्छी तरह से हाथ धोवें। पोल्ट्री फार्म में देखभाल करने वाले व्यक्ति ही फार्म के अन्दर प्रवेश करे, अन्य व्यक्ति प्रवेश न करे। उन्होंने मुर्गी पालकों से अपील की है कि पोल्ट्री फार्म के आसपास साफ सफाई रखी जायें। डॉ. रावत ने सलाह दी है कि चिकन व अण्डों को अच्छी तरह पकाकर खाने में उपयोग करे। सार्वजनिक स्थलों पर पक्षियों को दाना न डाले। उन्होंने बताया कि घने पेड़ जो कि कार्यालयों एवं अन्य जगहों पर हो वहां पक्षियों की बीट पर वाहन न चलाये एवं स्वयं भी न चलें क्योंकि ऐसा करने से संक्रमण अन्य स्थलों पर फैलने का खतरा रहता है, अतः ऐसे स्थलों पर सेनेटाइजेशन अनिवार्य रूप से करवायें।
बर्ड फ्लू से प्रभावित पक्षियों एवं मुर्गियों की पहचान कैसे करें
बर्ड फ्लू बीमारी से प्रभावित मुर्गी व पक्षी सुस्त हो जाते है। इनकी आंख एवं गर्दन एवं सिर के आसपास सूजन रहती है तथा इन पक्षियों की ऑंख एवं नाक से पानी बहता है और उन्हें श्वास लेने में तकलीफ होती है। पक्षियों की कलगी एवं पैर में नीलापन देखने को मिलता है तथा बर्ड फ्लू के कारण असामान्य रूप से अधिक पक्षियों की मृत्यु हो सकती है।
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