सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए उपयोगी सलाह
खण्डवा 21 जुलाई, 2020 - कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे घर से बाहर निकलते समय कोरोना वायरस से सुरक्षा हेतु अपने चेहरे पर मास्क, गमछा, रूमाल, कपड़ा लगाए तथा हाथों में मौजे, ग्लब्स लगाकर कार्य करने जैसी सावधानी रखें। किसान भाई समय समय पर 20 सेंकड तक अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोयें। उप संचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने किसानों को सलाह दी है कि कुछ समय से वर्षा न होने की स्थिति में खेत की मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए निंदाई, गुढाई तथा डोरा कुल्पा चलाने जैसी गतिविधि करें। साथ ही 10-15 दिन से अधिक समय तक खेत सूखा रहने पर सोयाबीन के खेत में सिंचाई का प्रबंध करें। उन्होंने किसानों को खरपतवार नाशक का फसल पर छिड़काव करने की सलाह भी दी। उप संचालक कृषि श्री गुप्ता ने बताया कि पीला मोजाइक वायरस जनित बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी है कि इस बीमारी से ग्रसित पौधो को खेत से उखाड़कर अलग कर दें। साथ ही खेतों में सफेद मक्खी जो कि इस वायरस को फैलाने का कार्य करती है, इसके नियंत्रण के लिए बीटासाफ्लूूथ्रिन व इमिडाक्लोफ्रिड कीटनाशक दवा 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर के मान से घोल तैयार कर छिड़काव करें। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल में एनथ्रेकनोज नामक बीमारी का प्रकोप होने की सूचना भी मिली है। इस बीमारी से निपटने के लिए टेबुकानाजोल 625 मि.ली. प्रति हेक्टेयर के मान से फसल पर छिड़काव करें। किसानों को सलाह दी गई है कि लोह तत्व की कमी के कारण भी फसल पीली पड़ सकती है, इससे किसान घबराये नहीं बल्कि समय के साथ साथ फसल स्वतः सही हो सकती है।
खेतों में इल्लियों व कीटों से बचाव के लिए डालें ये दवा
उप संचालक कृषि श्री गुप्ता ने बताया है कि पत्ती खाने वाली इल्लियों से सुरक्षा के लिए फूल आने से पहले क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर से फसल पर छिड़काव करें, इससे अगले 25 से 30 दिनों तक इन कीटों से सुरक्षा मिलती है। सोयाबीन का जैविक उत्पादन करने वाले किसानों को सलाह है कि चने की इल्ली तथा तम्बाकू की इल्ली के जैविक नियंत्रण हेतु जैविक कीटनाशक एच.ए.एन.पी.वी. अथवा एस.एल.एन.पी.वी. दोनों प्रत्येक 250 एल.ई. प्रति हेक्टेयर की दर से प्रकोप प्रारंभ होने की स्थिति में छिड़काव करें। इसी प्रकार इन पर्णभक्षी कीटों के नियंत्रण के लिए कीटनाशक फ्लुबेन्डियामाईड 20 डब्ल्यू.जी. 250-300 ग्राम प्रति हेक्टेयर या फ्लुबेन्डियामाईड 39.35 एस.सी. 150 मि.ली. प्रति हेक्टयेर या इन्डोक्साकार्ब 15.8 333 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या पूर्व मिश्रित बीटासायफ्लुथ्रिन एवं इमिडाक्लोप्रीड 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या पूर्व मिश्रित थायोमिथक्सम एवं लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मि.ली. प्रति हेक्टेयर में से किसी एक कीटनाशक का छिड़काव करें। सोयाबीन की फसल में फफूंदजनित रूट रॉट नामक बीमारियांे पर नियंत्रण के लिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे टेबूकोनाझोल 625 मि.ली. प्रति हेक्टेयर अथवा टेबूकोनाझोल एवं सल्फर 1 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबीन 20 डब्ल्यू.जी. 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा हेक्जाकोनाझोल 5 प्रतिशत ई.सी. 800 मि.ली. प्रति हेक्टेयर से छिड़काव करें।
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