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Thursday, 21 May 2020

टिड्डी दल से फसल के बचाव के उपाय अपनाएं किसान

टिड्डी दल से फसल के बचाव के उपाय अपनाएं किसान

खण्डवा 21 मई, 2020 -संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास म. प्र. भोपाल के द्वारा अवगत कराया गया कि म.प्र. के कई जिलों में जिसमें नीमच जिले की राजस्थान से लगी सीमा से लगे गांव में टिड्डी दल के आने की सूचना प्राप्त हुई है। वर्तमान में जिला हरदा के जोगा गांव में टिड्डी दल पहूँच चुका है, जो ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को ज्यादा नुकसान पहूँचा रहा है। टिड्डी दल खेतों में लगी फसलों ओर वनस्पतियों को खाकर नष्ट करते हैं। प्रधान वैज्ञानिक और प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र की सलाह अनुसार टिड्डी दल किसी भी स्थान पर पहुँचने की संभावना है। टिड्डी दल का समूह रात्रि कालीन समय में खेतों में रुक कर फसलों को नष्ट करता है। टिड्डी दल का प्रायः शाम 7 बजे से 9 बजे के मध्य खेतों में आता है तथा प्रातः 7ः30 बजे तक खेतों मंे नुकसान पहूँचाता है। जमीन में लगभग 500 से 1500 अण्डे प्रति कीट देकर सुबह उडकर अन्य स्थान पर चले जाते हैं। उप संचालक कृषि श्री आर. एस. गुप्ता ने किसान भाईयों को सलाह दी है कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर टिड्डी दल को अपने खेतों पर बैठने न दें। प्रकाश प्रपंच लगाकर के एकत्रित करें। खेतों में कल्टीवेटर/रोटावेटर चलाकर के टिड्डी दल को तथा उनके अण्डों को नष्ट करें। यदि अतिआवश्यक हो तो क्लोरोपायरीफास 50 प्रतिशत् ईसी 480 एमएल प्रति हेक्टर या वेनडियोकार्ब 80 डब्ल्यूपी की 125 ग्राम को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रतिहेक्टर की दर से छिडकाव करें या मेलाथियॉन 5 प्रतिशत् डीपी की 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर की दर से फसल पर भुरकाव करें। टिड्डी दल आने पर अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को अवगत करावें। कृषि विभाग द्वारा जिले में जिला स्तर पर टिड्डी दल के नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु कृषि वैज्ञानिक के सांथ जिला स्तरीय उडनदस्ता दल का गठन किया गया है।

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