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Wednesday, 4 December 2019

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद से चेतन को मिला जीवनदान

खुषियों की दास्तां

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद से चेतन को मिला जीवनदान

खण्डवा 4 दिसम्बर, 2019 - हरसूद विकासखण्ड के ग्राम चारखेडा निवासी दीपक यादव के बेटे चेतन की कमर में जन्म से ही छोटी गठान थी। देखते ही देखते वह गठान बड़ी हो गई और एक बड़े फोड़े के रूप में बदल गई। बच्चे की पीठ का फोड़ा करीब  2 किलो का हो गया, जिससे बच्चे कि समस्या अति गंभीर हो गई। बच्चे को हमेषा गोद मे ही रखना पड़ता था, उसे एक ही करवट कर सुलाना पड़ता था। उन्होंने जहां भी इलाज करवाया उन्हें निराषा ही हाथ लगी व परिजन मायूस होकर सारी उम्मीदे छोड़कर घर बैठ गए। इसी बीच एक दिन इसी बीच स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीम के डॉ. नजमा खान, डॉ. मुख्तार अंसारी ग्राम चारखेड़ा पहुंचे यहां उन्होंने बच्चों का परीक्षण किया तथा बच्चे की विकृति की पुष्टि की एवं उन्होंने बच्चे को तुरंत जिला अस्पताल खण्डवा मे रेफर किया। जहां आर.बी.एस.के. जिला समन्वयक श्री विनोद पंवार ने चेतन की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत शासन द्वारा मान्यता प्राप्त व आर.बी.एस.के. से संबद्ध निजी चिकित्सालय शैल्बी अस्पताल इंदौर के सर्जन डॉ. मुज्जफल रस्सीवाला से चर्चा की तथा बच्चे की पूर्व की जांचे व फोटो भेजकर उनसे राय ली।
        इंदौर के डॉ. रस्सीवाला ने बच्चे को तुरंत इंदौर बुलवाया व समस्त जांचे आर.बी.एस.के. अंतर्गत निःषुल्क की गई। जांच में बच्चे के सिर में पानी भरा होना भी पाया गया। चेतन की सर्जरी के लिए कुल 55,000 रू का एस्टिमेट बनाया गया तथा तुरंत सर्जरी के लिए बच्चे के परिजनों को कहा गया। अगले ही दिन आर.बी.एस.के. जिला समन्यक श्री विनोद पंवार ने उक्त प्रकरण आर.बी.एस.के. अंतर्गत पंजीकृत कर समस्त कागजी कार्यवाही पूर्ण कर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी खण्डवा डॉ. डी.एस. चौहान द्वारा रू. 55,000 का स्वीकृति आदेष जारी किया। चिकित्सकों की मेहनत और स्वास्थ्य विभाग की आर.बी.एस.के. टीम की तत्परता ने मासूम चेतन को मौत के मुंह से वापिस लाकर पूर्ण स्वस्थ्य करके उनके माता-पिता की गोद मे सौप दिया। अब चेतन के मॉं बाप व परिवारों के अन्य सदस्य स्वास्थ्य विभाग का आभार व्यक्त कर रहा है। चेतन के पिता दीपक यादव कहते है कि उन्हें बच्चे के बचने की कोई उम्मीद नही थी, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मदद से उनके बच्चे को नया जीवन मिला है।

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