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Thursday, 7 February 2019

निराश्रित गौवंश की देखरेख के लिए गांवों में बनेगी गौ शालाएं

निराश्रित गौवंश की देखरेख के लिए गांवों में बनेगी गौ शालाएं
गौ शालाओं के संचालन के लिए जिला व विकासखण्ड स्तर पर समिति गठित
 

खण्डवा 07 फरवरी, 2019 - मध्यप्रदेश में निराश्रित गौवंश की समुचित व्यवस्था हेतु गौशाला का निर्माण एवं संचालन किया जाना है। गौशालाओं का निर्माण कराने के लिए नोडल विभाग, पंचायत ग्रामीण विकास विभाग रहेगा। गौशालाओं का निर्माण मनरेगा योजना के अंतर्गत कराया जायेगा। गौशालाओं के संचालन एवं अनुश्रवण का नोडल विभाग पशुपालन होगा। इस परियोजना में विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इस हेतु जिला स्तर पर समिति गठित कर 10 फरवरी तक समिति की प्रथम बैठक आयोजित की जायेगी। समन्वय के लिए जिला स्तरीय गौशाला परियोजना समन्वय समिति गठित की गई। शासन द्वारा जारी आदेश अनुसार इस समिति के अध्यक्ष कलेक्टर रहेंगे। जबकि सदस्य सचिव के रूप में उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवायें कार्य करेंगे। इसके अलावा सदस्य के रूप में जिला पुलिस अधीक्षक, जिला वन मण्डल अधिकारी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, महाप्रबंधक विद्युत वितरण कम्पनी, उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, सहायक संचालक उद्यानिकी, जिला परियोजना प्रबंधक ग्रामीण आजीविका परियोजना को शामिल किया गया है।
इसी तरह अनुविभागीय स्तर पर गौशाला परियोजना समन्वय समिति के अध्यक्ष अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को बनाया गया है। जबकि सदस्य सचिव के रूप में पशु चिकित्सा विस्तार अधिकारी पशुपालन विभाग को शामिल किया गया है। इसके अलावा समिति में सदस्य के रूप में अनुविभागीय पुलिस अधिकारी, अनुविभागीय अधिकारी वन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, मुख्य नगर पालिका, नगर निगम अधिकारी, सहायक यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, अनुभाग अधिकारी विद्युत वितरण कम्पनी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ उद्यानिकी अधिकारी को शामिल किया गया है। 
यह समिति आवारा एवं निराश्रित गौवंश की जानकारी लेकर गौवंश संख्या के आधार पर जिले में गौशाला की स्थापना हेतु जिला स्तर पर रणनीति बनायेगी। यह समिति गौ शाला के लिए स्थल का चयन भी करेगी। साथ ही यह समिति गौशाला के संचालन हेतु क्रियान्वयन एजेंसी का चयन भी करेगी। इस समिति की बैठक प्रथम 3 माह में एक बार आयोजित होगी और इसके बाद वर्ष में कम से कम 4 बैठकें आयोजित की जायेगी। अनुविभागीय स्तर पर प्रथम 3 माह में प्रत्येक पखवाड़े में बैठक होगी इसके बाद हर वर्ष में 4 बैठकें आयोजित की जायेगी। 

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