बाल विवाह न करें, और न किसी को करने दें -कलेक्टर डा. अग्रवाल
खण्डवा 12 जनवरी ,2016 - बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है, जिसके कारण देश में बालक बालिकाओं को समय के पूर्व ही पारिवारिक बंधनों में बांध कर माता पिता द्वारा उनके भविष्य से खिलवाड़ किया जाता है । सरकार द्वारा इस कुरीति को समाज से पूर्णतः समाप्त करने के उद्देश्य से बाल विवाह निषेध अधिनियम लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत बाल विवाह होता पाये जाने पर वर-वधू दोनो ही के माता-पिता, भाई-बहन, अन्य पारिवारिक सदस्यों, विवाह करवाने वाले पंडित अथवा अन्य धर्मगुरू, विवाह में शामिल बाराती, घराती, बाजेवाले, घोड़ेवाले, हलवाई तथा अन्य सभी उक्त कार्यक्रम से संबंधित व्यक्तियों पर कानूनी कार्यवाही की जावेगी । कलेक्टर डा. एम के अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का विवाह निर्धारित आयु लड़की की 18 वर्ष एवं लड़के की 21 वर्ष के पूर्व किसी भी दशा में न करें । साथ ही उन्होंने समस्त नागरिकों से भी अनुरोध भी किया है कि ऐसे किसी भी विवाह कार्यक्रम में ना तो शामिल हों और ना ही अपनी सेवाएं देवें, अन्यथा उनके विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जावेगी ।
इसी क्रम में एक विशेष अपील विवाह कराने वाले धर्मगुरूओं तथा विवाह पत्रिका छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस के मालिकांे से की गयी है कि वे विवाह के पूर्व वर एवं वधू दोनों की सही आयु की संतुष्टि हेतु उनके मूल जन्म प्रमाणपत्र , अंकसूची, स्कूल की टी.सी. आदि की सत्यापित छायाप्रति प्राप्त कर अपने पास अनिवार्य रूप से संग्रहित करें तथा उम्र सही न होने की दशा में विवाह कदापि न करवाएं और ना ही मुद्रक संस्थाएं ऐसी पत्रिका छापें । यदि संभव हो तो वर-वधू की जन्म तिथि का पत्रिका में मुद्रण भी किया जाए। सूचनाकर्ता की जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जावेगी । यदि किसी धर्मगुरू पंडित या मौलवी आदि के द्वारा निर्धारित से कम आयु के लड़के अथवा लड़की का विवाह संपन्न कराया जाता है अथवा किसी मुद्रक द्वारा ऐसी पत्रिका छापी जाती है तो उस व्यक्ति या फर्म के विरूद्ध कड़ी कानूनी कार्यवाही की जावेगी।
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