सोयाबीन उत्पादक किसानों के लिए उपयोगी सलाह
खण्डवा 2 सितम्बर, 2020 - कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए कृषि कार्य के दौरान कृषि कार्य करते समय 4 से अधिक व्यक्तियों को इकट्ठा ना होने दें तथा उनके बीज 2 मीटर की पर्याप्त दूरी रखें। बुखार, सर्दी खांसी होने की स्थिति में अपने खेतों पर काम कर रहे श्रमिकों, व्यक्तियों को चिकित्सकीय परामर्ष की सलाह दें। कोरोना वायरस से सुरक्षा हेतु अपने चेहरे पर मास्क, गमछा, रुमाल, कपडा लगाएं तथा हाथों मंे मौजे व ग्लब्स लगाना अनिवार्य करें। कृषि कार्य करते समय मादक पदार्थ व तम्बाकू का सेवन ना करें। समय-समय पर 20 सेंकड तक अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोंये।
सोयाबीन कृषकों के लिए साप्ताहिक सलाह
उप संचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने बताया कि विगत सप्ताह में हुई भारी वर्षा के पश्चात् विभिन्न क्षेत्रों के कृषको द्वारा सोयाबीन की फसल में अचानक से पीली पड़ने एवं सूखने की सूचना प्राप्त हो रही है। इस समस्या के प्रमुख कारण एवं नियंत्रण के उपाय करें। सोयाबीन में इस वर्ष तना मक्खी एवं गर्डल बीटल का प्रकोप सामान्य से अधिक होने से सोयाबीन पीली पड़ रही है। सेमीलूपर की दूसरी पीढी़ की इल्लियों का प्रकोप भी अधिक देखने में आ रहा है जो पत्तियों के साथ-साथ फलियों को भी क्षति पहुंचा रही है। वर्षा के पश्चात् अनुकूल मौसम के कारण सोयाबीन में एन्थ्रेकनोज एवं राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट नामक रोगों का सक्रमंण बहुत तेजी से फैला है जिसके कारण सोयाबीन के पौधें सूखने लग रहें है। यह समस्या जल्दी पकने वाली प्रजातियों में ज्यादा देखी जा रही है जो कि परिपक्वता की स्थिति में है। इसके अतिरिक्त जहाँ भी तना मक्खी की इल्ली ने तने में 25 प्रतिशत से अधिक सुरंग बना ली है और जहाँ गर्डल बीटल की इल्ली पूर्ण विकसित लगभग पौन इंच हो गई है, वहाँ रसायनों के छिडकाव के पश्चात भी आर्थिक लाभ होने की संभावना कम हैं।
उप संचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने बताया कि तना मक्खी एवं गर्डल बीटल के नियंत्रण हेतु कृषको को सलाह है कि नियंत्रण हेतु बीटासायफ्लुथ्रिन व इमिडाक्लोप्रिड 350 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या थायमिथोक्सम व लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मि.ली. प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करें। जहाँ केवल सेमीकूपर इल्लियों का प्रकोप हो रहा है, वहाँ लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.9 एस.सी. 300 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या इन्डोक्साकार्ब 15.08 ई.सी. 333 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या फ्लुबेन्डियामाईड 39.035 एस.सी. 150 मि.ली. प्रति हेक्टेयर या फ्लुबेन्डियामाईड 20 डब्ल्यू. जी. 275 मिली प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करें। उन्होंने बताया कि एथ्रेकनोज एवं राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट नामक रोगों के नियंत्रण हेतु टेबूकोनाझोल 625 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा टेबुकोनाझोल व सल्फर 1 किग्रा प्रति हेक्टेयर अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबीन 20 डब्ल्यु.जी. 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा हेक्जाकोनाझोल 5 ई.सी. 800 मिली प्रति हेक्टेयर से छिडकाव करें। चूंकि सोयाबीन की फसल अब लगभग 70 दिन की और घनी हो चुकी है, अतः रसायनों का अपेक्षित प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए 500 ली. पानी प्रति हैक्ट. का प्रयोग अवश्य करे। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अभी भी जल भराव की स्थिति है, उनके लिए सलाह है कि शीघ्रातिशीघ्र अतिरिक्त जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें।
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