Friday, 5 June 2020

उपसंचालक कृषि ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को दी उपयोगी सलाह

उपसंचालक कृषि ने सोयाबीन उत्पादक किसानों को दी उपयोगी सलाह

खण्डवा 5 जून, 2020 - उत्पादन में स्थिरता की दृष्टि से 2 से 3 वर्ष में एक बार खेत की गहरी जुताई करना लाभप्रद होता है, अतः जिन किसान भाईयों ने खेतों की गहरी जुताई नही की हो, कृपया अवश्य करें। उसके बाद बख्ख्र एवं कल्टीवेटर एवं पाटा चलाकर खेत को तैयार करें। उपसंचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने किसान भाईयों से अपील की है कि वे उपलब्धता अनुसार अपने खेत में 10 मीटर के अंतराल पर सब सॉयलर चलाएं जिससे मिट्टी की कठोर परत को तोड़ने से जल अवशोषण, नमी का संचार अधिक समय तक बना रहें। खेत की अंतिम बखरनीस पूर्व अनुशंसित गोबर की खाद 10 टन प्रति हेक्टेयर या मुर्गी की खाद 2.5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डालकर खेत में फैला दें। अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित सोयाबीन किस्मों में से उपयुक्त किस्म का चयन कर बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उपलब्ध सोयाबीन बीज का अंकुरण परीक्षण न्यूनतम 70 प्रतिशत सुनिश्चित करें।
उपसंचालक कृषि श्री आर.एस. गुप्ता ने किसानों को सलाह दी है कि बौवनी के समय आवश्यक आदान जैसे उर्वरक, खरपतवारनाशक, फफुंदनाशक, जैविक कल्चर आदि का क्रय कर उपलब्धता सुनिश्चित करे। बौवनी के समय बीज उपचार के लिए अनुशंसित फफूंदनाशक जैसे पेनफ्लूफेन व ट्रायफ्लोक्सीस्ट्रोबीन 1 मि.ली. प्रति कि.ग्रा. बीज अथवा थायरम व कार्बोक्सीन 3 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज अथवा जैविक फफंूदनाशक ट्राईकोडर्मा 10 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज। तत्पश्चात जैविक कल्चर ब्रेडीराइजोबियम जपोनिकम एवं स्फूर घोलक जीवाणु पी.एस.एम. की उपलब्धता सुनिश्चित कर लें। पीला मौजाईक बीमारी की रोकथाम के लिए अनुंशसित कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30 एफ.एस. 10 मिली प्रति कि.ग्रा. बीज या इमिडाक्लोप्रिड 48 एफएस 1.2 मिली प्रति कि.ग्रा. बीज से बीज उपचार करने के लिए क्रय , उपलब्धता सुनिश्चित करें। वर्षा के आगमन पश्चात सोयाबीन की बौवनी के लिए लगभग 15 जून से जुलाई के प्रथम सप्ताह का उपयुक्त समय है। नियमित मानसून के पश्चात लगभग 4 इंच वर्षा होने के बाद ही बुआई करना उचित होता है। मानसून पूर्व वर्षा के आधार पर बौवनी करने से सूखे का लंबा अंतराल रहने पर फसल को नुकसान हो सकता है। 

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