Wednesday, 17 July 2019

मोक्षिता के लिए जीवन रक्षक बना ‘‘दस्तक अभियान‘‘

खुशियों की दास्तां

मोक्षिता के लिए जीवन रक्षक बना ‘‘दस्तक अभियान‘‘ 

खण्डवा 17 जुलाई, 2019 -  प्रदेश में इन दिनों लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और महिला-बाल विकास विभाग द्वारा दस्तक अभियान संचालित किया जा रहा है। इस दस्तक अभियान के तहत  आँगनवाड़ी, एएनएम और आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रमुख बाल्यकालीन बीमारियों की सामुदायिक स्तर पर सक्रिय पहचान कर उनके उपचार की व्यवस्था कर रहे है, जिससे कि बाल-मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सके। पिछले दिनों इसी दस्तक अभियान के तहत गांव की ए.एन.एम.श्रीमती राधा रावत, आशा कार्यकर्ता श्रीमती मंजू यादव और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मनीषा जायसवाल ने जब हरसूद विकासखण्ड के ग्राम चारखेड़ा में गणेश के घर पर दस्तक दी और गणेश के दोनों जुड़वा बच्चों की सेहत की जांच की गई, तो जांच में पाया गया कि एक बच्ची मोक्षिता का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 4 ग्राम था। जो कि जानलेवा हो सकता है। दस्तक अभियान के तहत गणेश के घर गए स्वास्थ्य व महिला बाल विकास के कर्मचारियों ने गणेश को बहुत समझाया कि वह अपनी बेटी मोक्षिता को जिला अस्पताल भिजवा दे तो वहां उसे निःशुल्क खून चढ़ाया जायेगा, जिससे वह स्वस्थ्य हो जायेगी। लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। 
इसी दौरान दस्तक दलों के निरीक्षण के लिए जिले से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.एस. चौहान जब चारखेड़ा पहुंचे तो स्वास्थ्य कर्मचारियों ने उन्हें मोक्षिता के बारे में बताया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. चौहान ने कु. मोक्षिता के पिता गणेश को बहुत समझाया तो वह बेटी को जिला चिकित्सालय ले जाने के लिए सहमत हो गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की बात मानकर गणेश अपनी बेटी मोक्षिता को आशा कार्यकर्ता के साथ लेकर जिला अस्पताल लेकर आया और उसकी अन्य जांचे भी वहां निःशुल्क की गई। साथ ही जिला चिकित्सालय खण्डवा के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भूषण की देखरेख में बच्ची को 3 युनिट रक्त चढ़ाया गया। कुछ दिन बाद जब स्वास्थ्य सुपरवाईजर व गांव की ए.एन.एम. ने ग्राम चारखेड़ा का फिर दौरा किया तो उन्होंने मोक्षिता के घर जाकर उनका फॉलोआफ किया और अब मोक्षिता का हीमोग्लोबिन स्तर 10 ग्राम पाया गया। मोक्षिता अब पूर्णतः स्वस्थ्य है बच्ची के पिता गणेश ने कहा कि जिला अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का व्यवहार बहुत अच्छा है और अच्छी तरह से इलाज होता है। जिला अस्पताल में अपनी बेटी का निःशुल्क इलाज कराकर गणेश व उसके परिवारजन अब बहुत खुश हैं।

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