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Tuesday, 14 August 2018

स्वतंत्रता दिवस पर खाने में तिरंगे पोषण आहार को शामिल करने का संकल्प लें

स्वतंत्रता दिवस पर खाने में तिरंगे पोषण आहार को शामिल करने का संकल्प लें
ग्राम सिंगोट में पोषण संवेदनषीलता कार्यषाला में मंत्री श्रीमती चिटनिस ने की अपील

खण्डवा 14 अगस्त, 2018 - प्रदेष की महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने मंगलवार को ग्राम सिंगोट में आयोजित पोषण संवेदनषीलता कार्यषाला में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि प्राचीनकाल में खाने में षठरस भोजन का महत्व था जिसमें खट्टा, मीठा, कड़वा, कसेला सहित कुल 6 रस शामिल होते थे। उन्होंने कहा कि भोजन में सभी पोष्टिक तत्व शामिल हो इसके लिए जरूरी है कि भोजन में भी तीनों रंग शामिल हो जिनमें हरे रंग की पत्ते वाली सब्जी, सफेद चावल और पीली केसरिया दाल आवष्यक रूप से शामिल हो। साथ ही भोजन में निम्बू, चटनी या सलाद जैसी बिना पकी सामग्री को जरूर शामिल किया जाये, क्योंकि गर्म करने पर विटामिन सी नष्ट हो जाता है और बिना विटामिन सी के आयरन शरीर में समाहित नहीं हो पाता। कार्यक्रम में पंधाना विधायक श्रीमती योगिता बोरकर, जनपद अध्यक्ष श्रीमती कंचन तनवे सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि व कृषि, उद्यानिकी, महिला बाल विकास के अधिकारीगण व कृषि वैज्ञानिक भी मौजूद थे।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि पूर्व में तिल्ली व मूंगफली का तेल हमारे देष में प्रयुक्त होता था, जिसमें बहुत से पोष्टिक तत्व पाए जाते थे, धीरे धीरे तिल्ली के स्थान पर सोयाबीन का तेल प्रयुक्त होने लगा जिसमें सिर्फ प्रोटिन ही पाया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने सोयाबीन को तिलहन के रूप में नहीं बनाया बल्कि सोयाबीन दलहन फसलों में शामिल होती है। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों व महिलाओं से कहा कि भोजन में चटनी व सलाद को आवष्यक रूप से प्रतिदिन शामिल करें और तिल्ली या मूंगफली के तेल में ही भोजन पकाए। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि सुरजने के पौधे अपने घर की बाड़ियों में या खेत की मेड़ो पर जरूर लगवाये। सुरजने में अन्य पोष्टिक आहारों की तुलना में कई गुना अधिक केल्षियम, आयरन, फास्फोरस, विटामिन व अन्य खनिज लवण पाए जाते है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि पोष्टिक आहार का गरीबी से कोई संबंध नहीं होता। उन्होंने सभी को आंवला, बेर, जैसे ऋतु फल खाने की सलाह दी जो कि सेवफल जैसे महंगे फलांे की तुलना में अत्यन्त सस्ते होते है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि घर के बुजुर्ग यह सुनिष्चित करें कि उनके घर की गर्भवती महिलाओं को पूरे पोष्टिक आहार भोजन में मिले। अक्सर यह देखा जाता है कि महिलाओं को घर के पुरूषों के खाने के बाद बचाखुचा खाना ही मिलता है, जबकि गर्भवती महिला एक नई पीढ़ी के षिषु को अपने गर्भ में पोषित कर रही है, ऐसे में उसे पोष्टिक आहार देने की चिंता परिवार के सभी सदस्यों को करनी चाहिए। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि बच्चे का दिमाग केवल 5 वर्ष की आयु तक ही बढ़ता, इस आयु तक बच्चों को दाल, तिल व मूंगफली युक्त प्रोटीनयुक्त पोषण आहार आवष्यक रूप से देना चाहिए। उन्होंने कहा कि गेंहू के साथ साथ ज्वार, बाजरा, कोदों, कुटकी, रागी के आटे की रोटियां भी घरों मंे बनायी जाना चाहिए। 

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