वृक्षारोपण हेतु पौधरक्षक नियुक्त होंगे
खण्डवा 05 जून, 2017 - मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत डॉ. वरदमूर्ति मिश्र ने बताया कि वृक्षारोपण सड़क/नहर किनारे, सार्वजनिक भवनों, मोक्षधाम, खेल मैदान, विद्यालय, छात्रावास, पंचायत/सामुदायिक भवन आदि जगहों पर किया जाना है। वृक्षारोपण के संबंध मंे उन्होंने कहा कि सड़क किनारे पौधरोपण करने के लिए 10 मीटर ग् 10 मीटर के बीच अंतराल होना चाहिए। वृक्षारोपण मंे आम, इमली, जामुन, महुआ, नीम, करंज, सुरजना , कैसिया सामिया, गुलमोहर, पेल्टाफारम, चिरोल, अमलतास, पीपल, बरगद एवं बॉंस आदि पौधे रोपे जाये तथा पौधो की सुरक्षा के लिए ट्रीगार्ड की व्यवस्था की जाये। इसी प्रकार सामुदायिक स्थल पर ब्लॉक प्लॉनटेषन के लिए 4 मीटर ग् 4 मीटर के हिसाब से 1 हेक्टयर में 625 पौधे प्रति हेक्टर में रोपे जा सकते है तथा सार्वजनिक परिसर में अथवा परिसर के चारों तरफ भी पौधे रोपे जा सकते है तथा उनकी सुरक्षा के लिए बाउण्ड्रीवाल नहीं होने की स्थिति में कटीली झांडी, बॉंस के ट्रीगार्ड व कंटीले तार का उपयोग किया जा सकता है।
जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि ‘‘पौधरक्षक‘‘ संबंधित ग्राम की वन समिति या स्वसहायता समूह , क्षेत्र में सक्रिय गैर शासकीय संस्था अथवा संबंधित ग्राम पंचायत हो सकती है। क्रियान्वयन एजेंसी को मानक पौधो की संख्या को यूनिट मानकर प्रति यूनिट एक पौधरक्षक की व्यवस्था करनी होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम में अथवा ग्राम के सार्वजनिक परिसरों, स्कूल, छात्रावास, सार्वजनिक भवन, मोक्षधाम आदि में सफाई के लिये अंषकालीन मानदेय पर कार्यरत कोई जाबकार्डधारी उपलब्ध हो तो उसे पौधरक्षक बनाने में सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाये। पौधरक्षक पौधों की रक्षा के लिए ट्री-गार्ड की व्यवस्था कर ट्री-गार्ड लगाना होगा तथा लागत सीमा के भीतर पौधरक्षक बॉंस, कॅंटीली झाड़ी अथवा कॅंटीले तार का ट्री-गार्ड बनाकर लगा सकते है। उन्होंने कहा कि पौधों में समय-समय पर निंदाई-गुदाई, दवा छिड़काव, खाद, सिंचाई एवं मिट्टी चढ़ाने का कार्य करना होगा तथा पौधे के मृत होने की दषा मंे नया पौधा लगाना होगा। पौधरक्षक संबंधित ग्राम का निवासी होकर नरेगा का जाबकार्डधारी होना चाहिए। पौधरक्षक के पास उसकी स्वयं की साईकल होना चाहिए ताकि साईकल पर वह पीपे या केन लगाकर सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था कर सकें और पौधों की सिंचाई हो सके। पौधरक्षक को सामग्री क्रय करने के लिए वेण्डर और नरेगा मजदूरी के लिए नियोजक मान्य किया जायेगा। पौधरक्षक आवष्यकतानुसार स्वयं के साथ साथ अन्य जॉबकार्डधारी लोगों को मजदूरी पर रख सकेगा। परियोजना अवधि पूर्ण होने पर पौधरक्षक को परियोजना से प्राप्त होने वाले लाभ जैसे फल, जलाऊ/इमारती लकड़ी का 50 प्रतिषत रखने का अधिकार होगा। शेष 50 प्रतिषत पर ग्राम पंचायत का अधिकार होगा और उसका निपटारा ग्राम पंचायत करेगी।
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